सरकार के सिगरेट और तंबाकू पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के फैसले से शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई। ITC और Godfrey Phillips के शेयर टूटे और एक ही दिन में सेक्टर से करीब 60,000 करोड़ रुपये की मार्केट कैप खत्म हो गई।
Stock Market: नए साल के पहले ही कारोबारी दिन शेयर बाजार में ऐसा झटका लगा, जिसने निवेशकों को हैरान कर दिया। एक सरकारी फैसले ने तंबाकू और सिगरेट सेक्टर में जबरदस्त बिकवाली करा दी। कुछ ही घंटों में बाजार से करीब 60,000 करोड़ रुपये की मार्केट कैप साफ हो गई। यह गिरावट इतनी तेज थी कि इसे हाल के वर्षों के सबसे बड़े सेक्टरल झटकों में गिना जा रहा है।
इस भारी गिरावट की अगुवाई देश की दिग्गज कंपनियों ITC और Godfrey Phillips India ने की। जैसे ही सरकार के नए टैक्स फैसले की खबर सामने आई, निवेशकों ने इन शेयरों में जमकर बिकवाली शुरू कर दी।
क्या है सरकार का फैसला
वित्त मंत्रालय ने सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में बड़ी बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह नया नियम 1 फरवरी 2026 से लागू होगा।
नए फैसले के तहत सिगरेट की लंबाई और कैटेगरी के आधार पर 1000 स्टिक पर 2050 रुपये से लेकर 8500 रुपये तक अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाई जाएगी। यह टैक्स मौजूदा 40 प्रतिशत GST के ऊपर लगाया जाएगा। मतलब साफ है कि सिगरेट कंपनियों पर टैक्स का बोझ अचानक काफी बढ़ने वाला है। यही वजह रही कि बाजार ने इस फैसले को बेहद नकारात्मक रूप में लिया।
खबर आते ही निवेशकों में घबराहट
जैसे ही यह जानकारी बाजार में फैली, निवेशकों ने तंबाकू सेक्टर से दूरी बनानी शुरू कर दी। सिगरेट कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
निवेशकों को डर है कि टैक्स बढ़ने से सिगरेट की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे मांग यानी वॉल्यूम पर असर पड़ेगा। इसका सीधा असर कंपनियों की कमाई और मुनाफे पर पड़ सकता है। इसी आशंका ने शेयरों को धड़ाम कर दिया।
ITC पर सबसे बड़ा असर
इस सरकारी फैसले का सबसे ज्यादा असर ITC पर पड़ा। ITC देश की सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी है और भारतीय बाजार में इसकी हिस्सेदारी करीब 75 प्रतिशत मानी जाती है।
शेयर बाजार में ITC के शेयर में करीब 9.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह मार्च 2020 के बाद ITC के शेयर में आई सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट रही।
एक ही दिन में ITC की मार्केट कैप में हजारों करोड़ रुपये की गिरावट आ गई। लंबे समय से ITC को एक डिफेंसिव और स्टेबल स्टॉक माना जाता रहा है, लेकिन इस फैसले ने निवेशकों की सोच को झकझोर दिया।
Godfrey Phillips के शेयरों में भारी टूट
ITC के अलावा Godfrey Phillips India के शेयरों में भी जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। कंपनी का शेयर 17 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया।
Godfrey Phillips का बिजनेस भी काफी हद तक सिगरेट पर निर्भर है। टैक्स बढ़ोतरी का असर इस कंपनी पर ITC की तुलना में ज्यादा गहरा माना जा रहा है। इसी वजह से निवेशकों ने यहां और आक्रामक बिकवाली की।
अन्य कंपनियों पर भी दबाव
इस फैसले का असर सिर्फ ITC और Godfrey Phillips तक सीमित नहीं रहा। वीएसटी इंडस्ट्रीज और एनटीसी इंडस्ट्रीज जैसी अन्य तंबाकू कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई। पूरे सेक्टर में नकारात्मक माहौल बन गया और निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए इन शेयरों से निकलना बेहतर समझा।
मार्केट कैप से उड़ गए 60,000 करोड़
इन सभी कंपनियों में आई गिरावट का नतीजा यह रहा कि तंबाकू और सिगरेट सेक्टर से कुल मिलाकर करीब 60,000 करोड़ रुपये की मार्केट कैप साफ हो गई। इतनी बड़ी रकम का एक ही दिन में बाजार से गायब होना यह दिखाता है कि सरकार के फैसलों का शेयर बाजार पर कितना गहरा असर पड़ सकता है।
वॉल्यूम पर क्यों है सबसे बड़ा खतरा
ब्रोकरेज हाउसों और मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर सिगरेट की बिक्री यानी वॉल्यूम पर पड़ेगा। नुवामा इंस्टीट्यूशनल रिसर्च के मुताबिक, इतिहास बताता है कि जब भी सिगरेट पर इतनी तेज टैक्स बढ़ोतरी हुई है, तब वॉल्यूम में 3 प्रतिशत से लेकर 9 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली है।
कीमतें बढ़ने से उपभोक्ता या तो खपत कम करते हैं या फिर सस्ते विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे कंपनियों की बिक्री प्रभावित होती है।
कीमतें बढ़ाने की मजबूरी
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का मानना है कि ITC जैसी कंपनियों को टैक्स का बोझ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए कीमतों में कम से कम 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
अगर कंपनियां कीमतें नहीं बढ़ाती हैं, तो उनके मार्जिन पर सीधा दबाव आएगा। और अगर कीमतें बढ़ाई जाती हैं, तो बिक्री घटने का खतरा रहेगा। यही दुविधा फिलहाल सिगरेट कंपनियों के सामने खड़ी है।
ITC की मजबूती पर भरोसा
हालांकि, सभी एक्सपर्ट पूरी तरह निराश नहीं हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि ITC जैसी बड़ी कंपनी के पास इस झटके को संभालने की क्षमता है। फिसडम के निरव करकरा के अनुसार ITC के पास मजबूत ब्रांड, बेहतर मार्जिन और डाइवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल है। कंपनी का एफएमसीजी, होटल और एग्री बिजनेस उसे कुछ हद तक सहारा देता है।
उनका मानना है कि ITC धीरे-धीरे इस टैक्स बढ़ोतरी के असर को संतुलित कर सकती है। हालांकि, छोटे खिलाड़ियों के लिए हालात ज्यादा मुश्किल हो सकते हैं।












