भारत के खेल मानचित्र पर अब तक अपेक्षाकृत पीछे माना जाने वाला बिहार आने वाले वर्षों में अपनी नई पहचान बनाने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बिहार सरकार ने 2026 को लक्ष्य बनाकर खेलों के विकास का एक व्यापक और दूरदर्शी मास्टरप्लान तैयार किया है।
पटना: बिहार, जिसे लंबे समय तक खेलों के क्षेत्र में पिछड़ा माना जाता रहा, अब 2026 में नई पहचान बनाने की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार ने खेलों के विकास के लिए एक व्यापक मास्टरप्लान तैयार किया है, जो न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा बल्कि गांव-गांव में छिपी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का रास्ता भी खोलेगा। सरकार का दावा है कि 2026 बिहार के खेल इतिहास में एक टर्निंग प्वाइंट साबित होगा।
सबसे पहले बुनियादी ढांचे की बात करें तो राज्य के सभी प्रमंडलों में अत्याधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं। पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे प्रमुख शहरों में मल्टी-स्पोर्ट्स स्टेडियम, इंडोर एरेना और सिंथेटिक ट्रैक तैयार किए जा रहे हैं, जो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराएंगे।
अत्याधुनिक खेल बुनियादी ढांचा बनेगा आधार
इस मास्टरप्लान का सबसे अहम स्तंभ है स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार। राज्य के सभी प्रमंडलों में आधुनिक खेल परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे प्रमुख शहरों में मल्टी-स्पोर्ट्स स्टेडियम, इंडोर एरेना और सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक विकसित किए जा रहे हैं।
पटना का पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और राजगीर में बन रहा अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर इस योजना की रीढ़ माने जा रहे हैं। खास तौर पर राजगीर में एशियाई मानकों के अनुरूप एक इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स विलेज तैयार किया जा रहा है, जहां प्रशिक्षण, आवास, मेडिकल सुविधा और रिकवरी सेंटर एक ही परिसर में उपलब्ध होंगे।

स्कूलों से शुरू होगी खेल संस्कृति
सरकार का दूसरा बड़ा फोकस स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूत करना है। 2026 तक राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में खेल पीरियड को अनिवार्य करने, प्रशिक्षित पीटी शिक्षकों की नियुक्ति और आधुनिक खेल उपकरण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत ‘एक स्कूल–एक खेल’ मॉडल लागू किया जाएगा, जिसमें हर स्कूल किसी एक खेल में विशेषज्ञता विकसित करेगा। इससे बच्चों में कम उम्र से ही प्रतिस्पर्धात्मक भावना और पेशेवर सोच विकसित हो सकेगी।
बिहार की असली ताकत उसके गांव हैं, और इसी को ध्यान में रखते हुए मास्टरप्लान में ग्रामीण प्रतिभा खोज कार्यक्रम को खास जगह दी गई है। पंचायत और प्रखंड स्तर पर नियमित खेल प्रतियोगिताओं का कैलेंडर तैयार किया गया है। कबड्डी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स और कुश्ती जैसे खेलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें बिहार की पारंपरिक मजबूती रही है। इन प्रतियोगिताओं से चुने गए खिलाड़ियों को जिला और राज्य स्तरीय खेल अकादमियों में भेजा जाएगा, जहां उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण मिलेगा।
छात्रवृत्ति और नौकरी से सुरक्षित होगा भविष्य
खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने खेल छात्रवृत्ति और सरकारी नौकरी को भी मास्टरप्लान का हिस्सा बनाया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार के साथ-साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति और पदोन्नति का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, उभरती प्रतिभाओं को मासिक छात्रवृत्ति देकर उन्हें आर्थिक दबाव से मुक्त रखने की योजना है, ताकि वे पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बाहरी विशेषज्ञों, पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और विदेशी कोचों की सेवाएं ली जा रही हैं। आधुनिक प्रशिक्षण तकनीक, स्पोर्ट्स साइंस, डेटा एनालिटिक्स और वीडियो एनालिसिस को बिहार के खेल ढांचे में शामिल किया जा रहा है। खिलाड़ियों की फिटनेस, डाइट और मानसिक मजबूती के लिए स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट और न्यूट्रिशनिस्ट की नियुक्ति भी प्रस्तावित है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।










