Supreme Court of India का बड़ा आदेश: पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया में झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारी होंगे शामिल

Supreme Court of India का बड़ा आदेश: पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया में झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारी होंगे शामिल

भारत में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े एक अहम मामले में Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में अब ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों को भी शामिल किया जाए। साथ ही स्पष्ट किया कि इन अधिकारियों के पास कम से कम तीन साल का कार्यानुभव होना चाहिए। दरअसल, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के न्यायिक अधिकारियों को SIR प्रक्रिया में लगाने का निर्देश दिया था। 

हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अदालत को बताया कि इस काम में लगभग 250 अधिकारियों को लगाया गया है, लेकिन करीब 50 लाख फॉर्म अब भी लंबित हैं। यदि प्रत्येक न्यायिक अधिकारी प्रतिदिन लगभग 250 फॉर्म की जांच भी करे, तो पूरी प्रक्रिया पूरी होने में करीब 80 दिन लग सकते हैं।

लंबित फॉर्म और बढ़ता दबाव

सुनवाई के दौरान बताया गया कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत लगभग 50 लाख फॉर्म लंबित हैं। इससे पहले अदालत ने राज्य के न्यायिक अधिकारियों को इस प्रक्रिया में लगाने का निर्देश दिया था। हालांकि, Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश ने सूचित किया कि करीब 250 अधिकारियों को पहले ही इस काम में लगाया जा चुका है, लेकिन लंबित आवेदनों की संख्या इतनी अधिक है कि यदि प्रत्येक अधिकारी प्रतिदिन 250 फॉर्म भी जांचे, तो पूरी प्रक्रिया समाप्त करने में लगभग 80 दिन लग सकते हैं।

इसी स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि शामिल किए जाने वाले अधिकारियों के पास कम से कम तीन वर्षों का न्यायिक अनुभव होना चाहिए।

दस्तावेजों को लेकर स्पष्ट निर्देश

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड, हाईस्कूल का एडमिट कार्ड और प्रमाणपत्र को मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा। साथ ही, 14 फरवरी से पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से जमा किए गए सभी दस्तावेजों को मान्य माना जाएगा। यह निर्देश उन मतदाताओं के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने समय सीमा के भीतर आवेदन किया था लेकिन प्रक्रिया में देरी के कारण अनिश्चितता का सामना कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress (टीएमसी) ने फैसले का स्वागत किया है। पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि राज्य सरकार पहले से ही इस प्रक्रिया को लेकर समय और संसाधनों की कमी की ओर संकेत कर रही थी। उनके अनुसार, जल्दबाजी में काम पूरा करने के दबाव के कारण जमीनी स्तर पर तैनात अधिकारियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

वहीं, विपक्षी दल Bharatiya Janata Party (भाजपा) ने इस आदेश को अलग नजरिए से देखा है। राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि दूसरे राज्यों से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने का अर्थ यह है कि न्यायालय को राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर पूर्ण भरोसा नहीं है।

28 फरवरी की डेडलाइन

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के लिए 28 फरवरी की समयसीमा तय की है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 28 फरवरी के बाद पूरक (Supplementary) सूची प्रकाशित करने की अनुमति होगी। अंतिम निर्वाचन सूची मुख्य और पूरक दोनों सूचियों को मिलाकर जारी की जाएगी। यह निर्णय राज्य में आगामी चुनावी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अद्यतन और सटीक मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद होती है।

Leave a comment