भारत-यूएई का द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 25 में 100 अरब डॉलर पार कर गया। CEPA समझौते के तहत निर्यात और निवेश में सुधार हुआ। 2032 तक दोनों देशों का लक्ष्य व्यापार को 200 अरब डॉलर तक बढ़ाना है।
India UAE Trade: हाल ही में भारत दौरे पर आए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। इस बैठक का खास महत्व 2022 में लागू हुए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement - CEPA) के बाद और भी बढ़ गया है। दोनों नेताओं ने वित्त वर्ष 25 में भारत और यूएई के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर को पार करने की सफलता का जिक्र किया।
भविष्य का लक्ष्य: 200 अरब डॉलर तक व्यापार
बैठक के दौरान राष्ट्रपति जायद और प्रधानमंत्री मोदी ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। इस लक्ष्य के तहत दोनों देशों ने निवेश, ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, आईटी और विनिर्माण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने का निर्णय किया। व्यापार बढ़ने के बावजूद, वर्तमान में भारत का व्यापार संतुलन यूएई के पक्ष में झुका हुआ है।
भारत का यूएई के साथ व्यापार घाटा
वित्त वर्ष 25 में भारत का यूएई के साथ व्यापार घाटा लगभग 27 अरब डॉलर रहा। भारत का यूएई को निर्यात वित्त वर्ष 15 में 33 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 36.64 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। वहीं, भारत का यूएई से आयात वित्त वर्ष 15 में 26.14 अरब डॉलर से बढ़कर 63.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस आयात में ऊर्जा उत्पादों का बड़ा योगदान रहा, जिससे भारत का व्यापार घाटा बढ़ा।

ऊर्जा सहयोग: LNG समझौता
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और अबू धाबी नैशनल ऑयल कंपनी गैस (ADNOC Gas) के बीच तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की बिक्री और खरीद का समझौता हुआ है। इसके तहत HPCL, ADNOC Gas से LNG खरीदेगा। हालांकि, पिछले दशक में यूएई से भारत के कुल आयात में ऊर्जा की हिस्सेदारी में कमी आई है। अब ऊर्जा आयात के अलावा अन्य वस्तुओं में भी व्यापार बढ़ावा मिल रहा है।
निर्यात में विविधीकरण
वित्त वर्ष 26 के अप्रैल से नवंबर तक भारत से यूएई को रत्न और आभूषण, रेडीमेड कपड़े, वस्त्र, ऑटो उपकरण, चमड़ा उत्पाद, कांच, सिरेमिक और सीमेंट का निर्यात बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 25 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है। निर्यात में यह वृद्धि CEPA के लाभ और अमेरिकी टैरिफ की स्थितियों के बाद भारत के व्यवसायिक प्रयासों का परिणाम है।
व्यापार में संतुलन की चुनौती
भारत और यूएई के बीच व्यापार का ढांचा लगातार बदल रहा है। जबकि भारत का निर्यात स्थिर गति से बढ़ रहा है, यूएई से आयात तेज़ी से बढ़ा है। इस कारण व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है। नीति निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ इसे संतुलन बनाने के लिए रणनीतियों की जरूरत मान रहे हैं। ऊर्जा के अलावा अन्य उत्पादों में निर्यात बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
CEPA के तहत दोनों देशों ने व्यापार और निवेश के नियमों को आसान बनाया है। इससे निर्यात में सुधार और विविधीकरण संभव हुआ है। CEPA के बाद भारत-यूएई व्यापार में वृद्धि हुई है और नए निवेश अवसर खुले हैं। व्यापारिक साझेदारी ने दोनों देशों के उद्योगों को लाभ दिया है, लेकिन संतुलित व्यापार के लिए निर्यात और आयात दोनों क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।












