भारतीय नौसेना को जल्द मिलेगा 'स्वदेशी न्यूक्लियर बैलिस्टिक सबमरीन INS अरिधमान', नेवी चीफ ने दी जानकारी

भारतीय नौसेना को जल्द मिलेगा 'स्वदेशी न्यूक्लियर बैलिस्टिक सबमरीन INS अरिधमान', नेवी चीफ ने दी जानकारी

नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि भारत जल्द ही अपनी तीसरी स्वदेशी न्यूक्लियर बैलिस्टिक सबमरीन INS अरिधमान को नौसेना में शामिल करेगा।

नई दिल्ली: भारत की समुद्री शक्ति को अभूतपूर्व मजबूती मिलने जा रही है। भारतीय नौसेना को बहुत जल्द अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिधमान (INS Aridhaman) मिलने वाली है। नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने मंगलवार को यह अहम जानकारी दी। इसके साथ ही भारत पहली बार समुद्र में तीन ऑपरेशनल न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) रखने वाला देश बन जाएगा, जो इसकी सामरिक शक्ति को नई ऊंचाई देगा।

एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि INS अरिधमान के ट्रायल्स अंतिम चरण में हैं और इसके बाद इसे औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। यह पनडुब्बी पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है और भारत के परमाणु त्रिशक्ति सिद्धांत (Nuclear Triad) को और मजबूत करेगी।

भारत की न्यूक्लियर ट्रायड को मिलेगी निर्णायक ताकत

INS अरिधमान के नौसेना में शामिल होने के बाद भारत के पास समुद्र में तीन परमाणु-सक्षम पनडुब्बियां ऑपरेशन में होंगी। इससे पहले दो SSBN पहले ही सेवा में हैं। यह भारत की सेकंड स्ट्राइक क्षमता (Second Strike Capability) को और अधिक विश्वसनीय और प्रभावशाली बनाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मज़बूत करेगा।

हालांकि, नेवी चीफ ने यह भी स्वीकार किया कि भारत का SSBN बेड़ा अभी अमेरिका, रूस और चीन जैसी बड़ी परमाणु नौसेनाओं की तुलना में छोटा है, लेकिन क्षमता और तकनीक के लिहाज से यह तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

2029 तक मिलेंगे नौसेना को राफेल फाइटर जेट

नेवी चीफ ने यह भी जानकारी दी कि भारतीय नौसेना को 26 राफेल मरीन फाइटर जेट्स की डील के तहत 2029 तक पहले चार विमान मिलने की उम्मीद है। यह डील हाल ही में साइन की गई है, जिसमें पांच साल के लिए परफॉर्मेंस-बेस्ड लॉजिस्टिक्स सपोर्ट भी शामिल है। ये अत्याधुनिक राफेल जेट्स समुद्री युद्ध क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे और एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेशन के लिए विशेष रूप से सक्षम होंगे।

एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि Project-75I के तहत छह उन्नत डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की खरीद एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी है और बहुत जल्द इसका औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया जाएगा। यह परियोजना भारत की अंडरवॉटर वॉरफेयर क्षमता को नया आयाम देगी।

ऑपरेशन सिंदूर में नेवी की निर्णायक भूमिका

नेवी चीफ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की भूमिका को लेकर भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान नौसेना के आक्रामक रुख और कैरियर बैटल ग्रुप की त्वरित तैनाती ने पाकिस्तान नौसेना को अपने बंदरगाहों तक सीमित रहने पर मजबूर कर दिया। भारतीय युद्धपोतों की रणनीतिक तैनाती के कारण पाकिस्तान को समुद्र में किसी भी तरह की हरकत करने का अवसर नहीं मिला।

भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की रफ्तार तेज़ है। नेवी चीफ ने बताया कि पिछले नेवी डे के बाद से अब तक 12 नए वॉरशिप्स को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इनमें अगस्त में कमीशन किया गया INS उदयगिरी भी शामिल है, जो भारत का 100वां स्वदेशी युद्धपोत है। इस उपलब्धि को चिह्नित करने के लिए “शिपबिल्डिंग से नेशन बिल्डिंग” विषय पर एक विशेष सेमिनार भी आयोजित किया गया था।

 

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