बिहार विधानसभा में इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विधानसभा अध्यक्ष का पद फिर अपने पास रखा है। भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी नेता डॉ. प्रेम कुमार को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है।
Bihar Vidhan Sabha: बिहार की 18वीं विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. प्रेम कुमार का चुनाव हो गया है। उन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया है और यह उनका नौंवा विधानसभा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचना है। ‘अमर उजाला’ ने पहले ही बताया था कि इस पद को लेकर जनता दल यूनाइटेड और भाजपा के बीच कोई विवाद नहीं था।
सोमवार को बिहार विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन, प्रोटेम स्पीकर के सामने तेजस्वी यादव और मंत्रियों के बाद डॉ. प्रेम कुमार ने विधायक के रूप में शपथ ली। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया, और आज उन्हें निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुन लिया गया।
निर्विरोध निर्वाचित, एनडीए प्रत्याशी के रूप में नामांकन
सोमवार को बिहार विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन, प्रोटेम स्पीकर के सामने डॉ. प्रेम कुमार ने शपथ ली। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया। आज उन्हें निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुन लिया गया। डॉ. प्रेम कुमार ने कहा, एनडीए नेतृत्व और पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया है। इसके बाद मैंने अपना नामांकन किया और आज मुझे अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। मैं सभी का धन्यवाद करता हूं।
नौवीं बार विधायक चुनकर यहां पहुंचा हूं, इसलिए जनता जनार्दन का भी आभार। उन्होंने साथ ही सभी विधायकों और नए सदस्यों को भी शुभकामनाएं दी।

निजी जीवन और पृष्ठभूमि
डॉ. प्रेम कुमार का निवास गया शहर के नई सड़क इलाके में है। वे कहार जाति से हैं, जो चंद्रवंशी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। परिवार में उनकी पत्नी के अलावा एक बेटा और बेटी हैं, दोनों शादीशुदा हैं। उनके बेटे ने भारतीय जनता युवा मोर्चा में पद संभाला है। डॉ. प्रेम कुमार की सबसे बड़ी खूबी यह रही है कि वे सुलभ और सहज उपलब्ध रहते हैं, जिसके कारण उन्होंने लगातार 35 साल से चुनाव जीतकर जनता का भरोसा बनाए रखा है।
गया टाउन विधानसभा सीट पर डॉ. प्रेम कुमार की पकड़ बेहद मजबूत रही है। उन्होंने पहली बार 1990 में कांग्रेस के वर्चस्व वाली सीट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद से अब तक उन्होंने लगातार जीत हासिल की है। डॉ. प्रेम कुमार का करियर इस बात का प्रमाण है कि किसी क्षेत्र में लगातार सफलता पाने के लिए स्थिरता और जनता से जुड़े रहना कितना जरूरी है। उनके सामने प्रत्याशी बदलते रहे, पार्टी बदलती रही, लेकिन डॉ. प्रेम कुमार हमेशा जीत के साथ आगे बढ़ते रहे।
गया टाउन में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी कई बार चुनौती दी। शुरुआती दौर में सीपीआई के शकील अहमद खान और मसूद मंजर, और बाद में कांग्रेस के संजय सहाय जैसे उम्मीदवार डॉ. प्रेम कुमार के सामने रहे। हालांकि हर बार डॉ. प्रेम कुमार ने अपने अनुभव और जनता के समर्थन के दम पर जीत हासिल की।
2015 के बाद से लगातार कांग्रेस ने यहां प्रत्याशी उतारे हैं, लेकिन डॉ. प्रेम कुमार की जीत में केवल मतों के अंतर का फर्क देखा गया। इसने स्पष्ट कर दिया कि उनका जनाधार कितना मजबूत और अडिग है।










