दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का असर अब हड्डियों और जोड़ों पर भी देखने को मिल रहा है। AIIMS की स्टडी के अनुसार, प्रदूषण में मौजूद छोटे कण (PM2.5) शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और क्रॉनिक इंफ्लेमेशन बढ़ाते हैं, जिससे रुमेटॉइड आर्थराइटिस और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और पहले से रोगग्रस्त लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं।
प्रदूषण और हड्डियों की सेहत: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर हड्डियों और जोड़ों पर भी दिखाई दे रहा है। AIIMS दिल्ली के रुमेटोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. उमा कुमार के मुताबिक, पीएम2.5 कण शरीर में जाकर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन बढ़ाते हैं। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और पहले से रुमेटॉइड आर्थराइटिस या अस्थमा से पीड़ित लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मास्क पहनें, घर में एयर प्यूरिफायर लगाएं और डॉक्टर की सलाह से दवाओं का सेवन नियमित करें।
प्रदूषण का असर हड्डियों और जोड़ों पर
दिल्ली और आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण ने अब सिर्फ फेफड़ों तक ही सीमित नहीं रहा। AIIMS दिल्ली की स्टडी के अनुसार, प्रदूषण में मौजूद छोटे कण (PM2.5) शरीर में जाकर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और क्रॉनिक इंफ्लेमेशन बढ़ाते हैं। इसका असर सीधे हड्डियों और जोड़ों पर पड़ता है, जिससे रुमेटॉइड आर्थराइटिस, जोड़ों में सूजन और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
डॉ. उमा कुमार, HOD रुमेटोलॉजी, AIIMS, कहती हैं कि प्रदूषण इम्यून सिस्टम को भी प्रभावित करता है, जिससे शरीर अपनी ही टिश्यू और सेल्स पर हमला करता है। खासकर पहले से रुमेटॉइड आर्थराइटिस पीड़ित लोगों के लिए यह खतरा अधिक है।

कौन अधिक जोखिम में हैं
इस खतरे से सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग, महिलाएं, रुमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीज और अस्थमा या एलर्जी वाले लोग हैं। प्रदूषण की वजह से इनके जोड़ों में दर्द, चलने-फिरने में परेशानी, पीठ में दर्द और लगातार थकान जैसी समस्याएं आम हो रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने पर इन लक्षणों में इजाफा देखा गया है। पिछले कई सालों के पैटर्न से पता चला है कि यह समस्या नियमित रहती है और समय पर सावधानी न रखने पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।
प्रदूषण से बचाव के उपाय
डॉ. कुमार बताती हैं कि प्रदूषण से बचाव के लिए मॉर्निंग वॉक टालें, मास्क पहनें और घर में एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, खानपान में पोषक तत्वों का ध्यान रखना और डॉक्टर की सलाह से दवाओं का नियमित सेवन करना जरूरी है।













