मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने बुधवार को BMC के नामित पार्षदों की घोषणा की। पार्षदों के 10 नाम एक सीलबंद लिफाफे में लाए गए। नामित पार्षदों का ऐलान राज्य सरकार के नियमों के अनुसार BMC करती है। इ
मुंबई: मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने बुधवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में 10 नए नामित पार्षदों की घोषणा कर दी है। यह ऐलान एक सीलबंद लिफाफे में किया गया, जिसमें पारदर्शिता और प्रक्रिया का विशेष ध्यान रखा गया। इन 10 नामित पार्षदों में सबसे अधिक संख्या भाजपा (BJP) की है। BMC के नियमों के अनुसार, नामित पार्षदों को वोटिंग का अधिकार नहीं होता, लेकिन वे बैठकों और चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं। BMC में कुल 227 निर्वाचित पार्षद हैं, जो महापौर का चुनाव करते हैं। इस बार रितु तावड़े को महापौर चुना गया है।
नामित पार्षदों की पार्टीवार संख्या
इस साल नियुक्त 10 नामित पार्षदों में पार्टीवार वितरण इस प्रकार है:
- BJP: 4
- शिवसेना UBT: 3
- शिवसेना शिंदे गुट: 2
- कांग्रेस: 1
यह पहली बार है जब BMC में 10 नामित पार्षदों को शामिल किया गया है। इससे पहले यह संख्या पांच थी। नामित पार्षद अपनी वार्डों और महानगरपालिका के विकास कार्यों में सक्रिय सुझाव दे सकते हैं।

नामित पार्षदों की पूरी सूची
- प्रतीक मधुसदन करपे - BJP
- प्रवीण छेड़ा - BJP
- नितेश सिंह - BJP
- कमलाकर दलवी - BJP
- राज सुर्वे - शिवसेना
- उमेश माने - शिवसेना
- माधुरी मांजरेकर - शिवसेना UBT
- साईंनाथ दुर्गे - शिवसेना UBT
- कैलाश पाठक - शिवसेना UBT
- वीरेंद्र चौधरी - कांग्रेस
इन नामित सदस्यों के पास वोटिंग का अधिकार नहीं है, लेकिन वे महानगरपालिका की बैठकों में चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं और अपने क्षेत्रों के विकास के लिए सुझाव दे सकते हैं।
BMC में राजनीतिक परिदृश्य
हाल ही में हुए BMC चुनाव 2026 में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जिसने कुल 227 में से 89 सीटें जीतीं। इसके बाद शिवसेना UBT ने 65, शिंदे गुट ने 29, कांग्रेस ने 24, AIMIM ने 8, MNS ने 6, NCP ने 3, समाजवादी पार्टी ने 2 और NCPSP ने 1 सीट हासिल की। इन नतीजों ने BJP को बहुमत स्थापित करने में मदद की। इसके बाद महापौर पद के लिए BJP की रितु तावड़े का चयन हुआ।
BMC के नामित पार्षद शहरी विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य स्थानीय मुद्दों पर महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उनके पास वोटिंग का अधिकार नहीं है, लेकिन सदन में भागीदारी उन्हें नीति निर्माण और चर्चा में शामिल होने का मौका देती है।











