बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री हसन महमूद ने कहा कि हिंदुओं पर हो रहे हमले हॉरर फिल्म से भी ज्यादा भयानक हैं। उन्होंने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर हिंसा रोकने में नाकामी और चुनाव प्रभावित करने के आरोप लगाए।
Dhaka: बांग्लादेश में अगले महीने फरवरी में आम चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन उससे पहले देश गंभीर राजनीतिक अस्थिरता, हिंसा और अविश्वास के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय तक सत्ता में रही शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इसी बीच बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता हसन महमूद ने अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
हसन महमूद ने कहा कि मौजूदा हालात में बांग्लादेश में होने वाला चुनाव न तो स्वतंत्र होगा और न ही निष्पक्ष। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार एक मुखौटा मात्र है और असल में देश को पाकिस्तान समर्थित और कट्टरपंथी ताकतें चला रही हैं।
चुनाव की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल
एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में हसन महमूद ने 12 फरवरी को होने वाले चुनावों की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि देश में इतनी ज्यादा अराजकता है कि खुद चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को भी भरोसा नहीं है कि चुनाव होंगे या नहीं।
महमूद के अनुसार अगर चुनाव होते भी हैं तो वे पहले से तय यानी फिक्स होंगे। उन्होंने कहा कि जब देश की सबसे लोकप्रिय और आजादी दिलाने वाली पार्टी को चुनाव से बाहर कर दिया गया हो, तब लोकतंत्र की बात करना ही बेमानी है।
अवामी लीग को चुनाव से बाहर करने का आरोप
हसन महमूद ने कहा कि अवामी लीग बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई से जुड़ी पार्टी है और कई बार सत्ता में रह चुकी है। इसके बावजूद इस पार्टी और उसके सहयोगी दलों को चुनाव में हिस्सा लेने से रोका गया है।
उन्होंने दावा किया कि इसके कारण 60 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता अपनी मर्जी से वोट डालने के अधिकार से वंचित हो जाएंगे। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया।
अभी भी अवामी लीग को मिल रहा जनता का समर्थन

हसन महमूद ने रॉयटर्स समेत कई अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए कहा कि बांग्लादेश की 50 से 60 प्रतिशत आबादी आज भी अवामी लीग और उसके सहयोगी दलों का समर्थन करती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरिम प्रशासन जानबूझकर अवामी लीग को हाशिए पर डाल रहा है क्योंकि बीते डेढ़ साल में सरकार की लोकप्रियता तेजी से गिरी है। इसके पीछे आर्थिक कुप्रबंधन, महंगाई और कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति प्रमुख कारण हैं।
देश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त
पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि आज बांग्लादेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है। हर तरफ असुरक्षा का माहौल है। महंगाई चरम पर है और आम लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बांग्लादेश अब प्रभावी रूप से कट्टरपंथी ताकतों के नियंत्रण में है। हिंसा का स्तर इतना बढ़ चुका है कि उसने समाज को अंदर से खोखला कर दिया है।
हिंदुओं पर हमलों को बताया हॉरर फिल्म से भी भयानक
हसन महमूद ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों को लेकर बेहद गंभीर और भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा इतनी क्रूर हो चुकी है कि वह किसी हॉरर फिल्म से भी ज्यादा डरावनी लगती है।
उन्होंने ईशनिंदा के झूठे आरोप में मारे गए दीपू चंद्र दास की लिंचिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति को भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद उसके शव को बिजली के खंभे या पेड़ से लटकाकर जला दिया गया और सैकड़ों लोग तमाशबीन बने रहे और वीडियो बनाते रहे।
महमूद ने सवाल उठाया कि क्या किसी सभ्य देश में ऐसा दृश्य देखा जा सकता है। उन्होंने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया।
अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप
हसन महमूद ने आरोप लगाया कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सिर्फ नाम की सरकार है। असल में फैसले कट्टरपंथी और बाहरी ताकतें ले रही हैं। उनका कहना है कि सरकार ने जानबूझकर कानून व्यवस्था को कमजोर होने दिया है ताकि डर का माहौल बना रहे और चुनाव अपने हिसाब से कराए जा सकें।










