मोदी-आडवाणी की पुरानी तस्वीर साझा करने पर उठे विवाद पर दिग्विजय सिंह ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि वे RSS-BJP की विचारधारा का विरोध करते हैं, लेकिन किसी संगठन की ताकत और अनुशासन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
New Delhi: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तस्वीर शेयर करने के बाद उठे विवाद पर अपनी सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे RSS और BJP की विचारधारा के खिलाफ हैं, लेकिन किसी भी संगठन की ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनकी इस सफाई के बाद कांग्रेस में फैली अटकलों और अंदरूनी कलह को शांत करने की कोशिश हुई है।
विवाद कैसे शुरू हुआ
शनिवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक से पहले दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी की 1996 की पुरानी तस्वीर लालकृष्ण आडवाणी के साथ सोशल मीडिया पर साझा की। इस तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा कि यह बहुत प्रभावशाली है और दिखाता है कि RSS के स्वयंसेवक और जनसंघ के कार्यकर्ता किस तरह से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनते हैं। इस पोस्ट में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को टैग भी किया, जिससे पार्टी में अंदरूनी संदेश देने की अटकलें तेज हो गईं।
कांग्रेस में बढ़ी चर्चा
दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट के वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने इसे कांग्रेस में संभावित अंदरूनी कलह का संकेत माना। सोशल मीडिया पर भी यह पोस्ट तेजी से फैल गई और बीजेपी के कई नेताओं ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आलोचना की। इस विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या कांग्रेस के वरिष्ठ नेता द्वारा शेयर की गई यह तस्वीर संगठन के खिलाफ किसी संदेश के रूप में ली जा सकती है।

दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया अपना रुख
रविवार को इस विवाद पर सफाई देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी में रहकर हमेशा सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई लड़ते आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे RSS और BJP की विचारधारा का विरोध करते हैं, लेकिन हर संगठन को उसकी ताकत और अनुशासन के लिए सम्मान देना जरूरी है। उनका कहना था कि यह पोस्ट केवल संगठन की कार्यशैली और जमीनी ताकत को दिखाने के लिए थी, किसी भी राजनीतिक समर्थन या प्रशंसा का संकेत नहीं था।
पोस्ट का राजनीतिक संदर्भ
दिग्विजय सिंह की पोस्ट ने यह भी दिखाया कि कांग्रेस के अंदर वरिष्ठ नेताओं का दृष्टिकोण कभी-कभी सोशल मीडिया के जरिए पार्टी नेतृत्व तक पहुंचता है। उन्होंने यह उदाहरण साझा करते हुए बताया कि किस तरह से जमीनी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों की मेहनत और अनुशासन किसी संगठन को मजबूती प्रदान करता है। उनका कहना था कि राजनीतिक संगठन चाहे किसी भी विचारधारा के हों, उनकी कार्यशैली और अनुशासन का सम्मान करना जरूरी है।
सफाई के बाद प्रतिक्रियाएं
दिग्विजय सिंह की सफाई के बाद कांग्रेस के भीतर फैली अटकलें कुछ हद तक शांत हुई हैं। पार्टी नेतृत्व ने भी इस पोस्ट को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने माना कि दिग्विजय सिंह ने केवल संगठन की ताकत का उदाहरण प्रस्तुत किया था। इसके अलावा, पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इसे सकारात्मक नजरिए से देखा और कहा कि यह केवल राजनीतिक सीखने और अनुभव साझा करने का उदाहरण है।










