एनवीएस–02 मिशन पर इसरो का बड़ा खुलासा, इंजन एक्टिवेशन में आई तकनीकी रुकावट सामने

एनवीएस–02 मिशन पर इसरो का बड़ा खुलासा, इंजन एक्टिवेशन में आई तकनीकी रुकावट सामने

ISRO ने एनवीएस–02 मिशन में ऑर्बिट रेजिंग विफल होने का कारण बताया। पायरो सिस्टम सिग्नल इंजन तक नहीं पहुंचा, जिससे कक्षा परिवर्तन अधूरा रहा। एजेंसी ने जांच पूरी कर भविष्य के मिशनों में जरूरी सुधार लागू कर दिए हैं।

New Delhi: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO ने एनवीएस–02 मिशन के दौरान आई तकनीकी गड़बड़ी पर विस्तृत रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उपग्रह को अंडाकार कक्षा से गोलाकार कक्षा में ले जाने की प्रक्रिया क्यों पूरी नहीं हो सकी। इसरो ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य के मिशनों में ऐसी समस्या दोबारा न आए, इसके लिए जरूरी सुधार लागू कर दिए गए हैं।

यह मिशन 29 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कक्षा बढ़ाने की अहम प्रक्रिया के दौरान तकनीकी समस्या सामने आई। अब इसरो की एपेक्स कमेटी ने जांच पूरी कर कारणों और सुधारों की जानकारी सार्वजनिक की है।

लॉन्च से लेकर शुरुआती सफलता तक

एनवीएस–02 उपग्रह को GSLV-F15 के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था। रॉकेट ने उपग्रह को उसकी तय अंडाकार कक्षा 170 गुणा 37,785 किलोमीटर में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया था। लॉन्च के बाद उपग्रह निर्धारित समय पर लॉन्च व्हीकल से अलग हो गया। इसके बाद सोलर पैनल तैनात हुए और बिजली उत्पादन शुरू हो गया।

अलग होने के तुरंत बाद स्पेसक्राफ्ट ने कई ऑटोनॉमस गतिविधियां पूरी कीं। इसमें ओरिएंटेशन को स्थिर करना और सिस्टम की जांच शामिल थी। इन सभी चरणों में कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई। शुरुआती सफलता ने संकेत दिया कि मिशन सामान्य रूप से आगे बढ़ रहा है।

कक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया में आई रुकावट

समस्या तब सामने आई जब अंडाकार कक्षा से गोलाकार कक्षा में जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस प्रक्रिया को ऑर्बिट रेजिंग कहा जाता है। इसका उद्देश्य उपग्रह को अंतिम निर्धारित गोलाकार कक्षा में स्थापित करना होता है ताकि वह अपना काम सुचारु रूप से कर सके।

इसरो ने बताया कि ऑर्बिट बढ़ाने का कार्य पूरा नहीं हो सका। निर्धारित इंजन फायरिंग अपेक्षित तरीके से नहीं हो पाई। इसके बाद मिशन टीम ने स्थिति का विश्लेषण शुरू किया और एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई, जिसे एपेक्स कमेटी नाम दिया गया।

एपेक्स कमेटी की जांच

एपेक्स कमेटी ने टेलीमेट्री डेटा और सिमुलेशन अध्ययन के आधार पर गहन जांच की। विस्तृत विश्लेषण के बाद कमेटी ने पाया कि मुख्य समस्या ड्राइव सिग्नल के इंजन की ऑक्सीडाइज़र लाइन तक नहीं पहुंचने से जुड़ी थी। यह सिग्नल पायरो वाल्व तक जाना चाहिए था, जिससे इंजन सक्रिय होकर कक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी करता।

जांच में सामने आया कि मेन और रिडंडेंट कनेक्टर पाथ में कम से कम एक कॉन्टैक्ट के अलग होने की संभावना थी। इसी कारण सिग्नल आगे नहीं पहुंच पाया और इंजन अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर सका। यह तकनीकी गड़बड़ी कक्षा परिवर्तन की प्रक्रिया को रोकने का कारण बनी।

भविष्य के लिए सुधारात्मक कदम

रिपोर्ट में बताया गया है कि एपेक्स कमेटी ने पायरो सिस्टम की रिडंडेंसी और भरोसेमंदता बढ़ाने के लिए कई सिफारिशें की हैं। इन सिफारिशों को तुरंत लागू किया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में सिग्नल ट्रांसमिशन और इंजन एक्टिवेशन में किसी तरह की बाधा न आए।

इन सुधारों को 2 नवंबर 2025 को लॉन्च किए गए सीएमएस–03 मिशन में लागू किया गया। यह मिशन LVM-3 M5 के जरिए भेजा गया था। इस मिशन में पायरो सिस्टम ने पूरी तरह से अपेक्षित प्रदर्शन किया और उपग्रह को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया। इससे यह साबित हुआ कि सुझाए गए सुधार प्रभावी रहे।

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