दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख तय कर दी। लालू यादव ने आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में अपने और परिवार के सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने वाले निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए यह याचिका दाखिल की थी।
पटना: चर्चित IRCTC होटल घोटाला मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को लेकर एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को लालू यादव की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ तय किए गए आरोपों को चुनौती दी है। अदालत ने इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख 14 जनवरी तय की है।
यह मामला न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिका स्वीकार करते हुए CBI को नोटिस भेजा, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि हाई कोर्ट इस प्रकरण के कानूनी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करेगा।
निचली अदालत के आदेश को दी गई चुनौती
लालू प्रसाद यादव ने अपनी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप तय किए गए थे। निचली अदालत ने 13 अक्टूबर को दिए गए अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है।
लालू यादव की ओर से दलील दी गई कि निचली अदालत ने तथ्यों और कानून का सही आकलन किए बिना आरोप तय कर दिए। याचिका में कहा गया है कि इस मामले में न तो भ्रष्टाचार का कोई ठोस आधार है और न ही आपराधिक साजिश या धोखाधड़ी को साबित करने लायक पर्याप्त सबूत।

याचिका में क्या तर्क दिए गए
लालू यादव ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि CBI की जांच अनुमानों और कयासों पर आधारित है। उनका दावा है कि आरोपियों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया या किसी को अनुचित लाभ पहुंचाया। याचिका में यह भी कहा गया है कि केवल नीति से जुड़े फैसलों या प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता, जब तक कि उसमें स्पष्ट रूप से भ्रष्ट मंशा साबित न हो।
क्या है IRCTC होटल घोटाला
यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। CBI के अनुसार, इस दौरान IRCTC के अधीन रांची और पुरी स्थित ऐतिहासिक BNR होटलों की लीजिंग प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं की गईं। CBI ने 5 जुलाई 2017 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि लालू यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड (SHPL) के मालिकों — विजय कोचर और विनय कोचर — को फायदा पहुंचाया। बदले में, लालू यादव के परिवार को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिला।











