हिमाचल प्रदेश का बदलेगा एजुकेशन सिस्टम, सरकार ने की नई योजना की घोषणा

हिमाचल प्रदेश का बदलेगा एजुकेशन सिस्टम, सरकार ने की नई योजना की घोषणा

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्कूलों में स्पेशल इंस्ट्रक्टर्स नियुक्त करने, चार स्कूलों को CBSE बोर्ड से जोड़ने और पायलट प्रोजेक्ट के तहत मल्टीपल सब्जेक्ट सिस्टम लागू करने की घोषणा की। इन कदमों का उद्देश्य छात्रों की पढ़ाई और रुचि के अनुसार सीखने की क्षमता बढ़ाना है।

शिक्षा सुधार में नया कदम: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के स्कूल सिस्टम में अहम बदलावों की घोषणा की है। इसके तहत स्कूलों में स्पेशल इंस्ट्रक्टर्स नियुक्त किए जाएंगे, चार सरकारी स्कूलों को CBSE बोर्ड से जोड़ा जाएगा और पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुनिंदा स्कूलों में मल्टीपल सब्जेक्ट सिस्टम लागू किया जाएगा। इस पहल का मकसद छात्रों की कमजोर विषयों में मदद करना और उन्हें अपनी रुचि के अनुसार सीखने का मौका देना है।

कमजोर विषयों में मिलेगी स्पेशल मदद

सीएम सुक्खू ने बताया कि राज्य के स्कूलों में जल्द ही स्पेशल इंस्ट्रक्टर्स की नियुक्ति की जाएगी। ये इंस्ट्रक्टर खास तौर पर इंग्लिश और मैथमेटिक्स जैसे विषयों में छात्रों की मदद करेंगे, जहां आमतौर पर बच्चे कमजोर रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों का काम सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार करना और उनकी सीखने की क्षमता को बेहतर बनाना होगा। इसके लिए भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि बदलाव जल्दी जमीन पर दिख सकें।

चार स्कूलों को मिलेगा CBSE दर्जा

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य के चार सरकारी स्कूलों को CBSE बोर्ड से जोड़ा जाएगा। इनमें उनके पैतृक ग्राम पंचायत अमलेहर का स्कूल भी शामिल है। अगले सत्र से इन स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाई शुरू हो जाएगी।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि क्षेत्र में राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षा से छात्रों को आगे बढ़ने का मजबूत आधार मिलेगा।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नया सिस्टम

राज्य सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चार चयनित स्कूलों में मल्टीपल सब्जेक्ट सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके तहत छात्र स्कूल स्तर पर ही अपनी रुचि के विषय चुन सकेंगे।

सरकार का कहना है कि इससे बच्चों को अपनी पसंद और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो भविष्य में इसे अन्य स्कूलों में भी लागू किया जा सकता है।

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