AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के अकोला में रैली में नवनीत राणा के बच्चों की संख्या वाले बयान का पलटवार किया। उन्होंने निजी जीवन में दखल देने को गलत बताया और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।
मुंबई: बीजेपी नेता नवनीत राणा के ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले बयान के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के अकोला में आयोजित रैली में चुटकी ली। उन्होंने कहा कि उनके छह बच्चे हैं और उन्होंने सवाल किया कि "तुम्हें आठ बच्चे पैदा करने से कौन रोक रहा है।" ओवैसी ने इस टिप्पणी में राणा का नाम लिए बिना ही निशाना साधा और अपने अंदाज में विरोध जताया।
ओवैसी ने कहा कि उनकी दाढ़ी अब सफेद हो रही है और यह सवाल उठाना सही नहीं है कि किसी को कितने बच्चे होने चाहिए। उन्होंने कहा, "किसी ने कहा कि चार बच्चे होने चाहिए। चार ही क्यों? आठ बच्चे पैदा करो, तुम्हें कौन रोक रहा है।"
नवनीत राणा का बयान
दरअसल, इससे पहले बीजेपी नेता नवनीत राणा ने हिंदुओं से अपील की थी कि वे कम से कम तीन से चार बच्चे पैदा करें। उनका तर्क था कि कुछ लोगों की कई पत्नियां और कई बच्चे होते हैं, जिससे उनकी आबादी बढ़ती रहती है। राणा ने कहा, "मैं सभी हिंदुओं से अपील करती हूं। सुनिए, ये लोग खुलेआम कहते हैं कि उनकी चार पत्नियां और 19 बच्चे हैं। मेरा सुझाव है कि हमें कम से कम तीन से चार बच्चे पैदा करने चाहिए।"
नायडू पर भी साधा निशाना
ओवैसी ने अपने बयान में RSS प्रमुख मोहन भागवत और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और केंद्र सरकार के नेतृत्व वाली TDP और बीजेपी के नेताओं ने भी बच्चों की संख्या को लेकर बयान दिए हैं। ओवैसी ने कहा कि इस तरह के बयानों से समाज में गलत संदेश जाता है और इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

ओवैसी ने इस मौके पर यह भी कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय को उनके निजी जीवन के मामलों में दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यह नीति और बयान राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा हैं और इसे सामाजिक जिम्मेदारी के नजरिए से देखना जरूरी है।
बच्चों की संख्या को लेकर चर्चा
विशेषज्ञों का कहना है कि कम बच्चे होने से परिवार को शिक्षा और विकास के अधिक अवसर मिलते हैं। इसके साथ ही देश की जनसंख्या वृद्धि की समस्या भी नियंत्रित रहती है। ओवैसी ने अपने बयान में संकेत दिया कि ऐसे बयानों के जरिए समुदायों में विभाजन और गलतफहमी पैदा की जा रही है।
जानकार मानते हैं कि बच्चों की संख्या पर राजनीतिक बयानबाजी करना प्रोपेगंडा का हिस्सा हो सकता है। ओवैसी का तर्क है कि हर परिवार अपनी इच्छा और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर निर्णय ले। उन्होंने कहा कि किसी को किसी और के जीवन और परिवार के निर्णय में दखल देने का अधिकार नहीं है।
राजनीतिक मंचों पर बहस का मुद्दा
बच्चों की संख्या और परिवार नियोजन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी अक्सर चुनाव और समाज में ध्यान आकर्षित करने के लिए की जाती है। इस मामले में भी राजनीतिक दलों के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।
ओवैसी ने इस मौके पर यह भी कहा कि समाज में प्रोपेगंडा फैलाने वाले बयान बहुत नुकसान कर सकते हैं। उन्होंने सभी समुदायों और धर्मों को सलाह दी कि वे अपने निजी जीवन के मामलों को राजनीतिक विवाद का हिस्सा न बनने दें।











