राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय भवन निर्माण: फरवरी में भूमिपूजन करेंगे मंत्री इंदर सिंह परमार

राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय भवन निर्माण: फरवरी में भूमिपूजन करेंगे मंत्री इंदर सिंह परमार

छिंदवाड़ा जिले में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के 58वें प्रांतीय अधिवेशन में शामिल उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के भवन निर्माण को लेकर बड़ी घोषणा की है।

छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के 58वें प्रांतीय अधिवेशन में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के भवन निर्माण को लेकर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगामी फरवरी में पुनः छिंदवाड़ा आकर विश्वविद्यालय की बिल्डिंग का भूमिपूजन करेंगे।

सांसद विवेक बंटी साहू की सक्रिय पहल और लगातार प्रयासों के बाद यह निर्णय लिया गया। सांसद साहू ने मंत्री को विस्तार से जानकारी दी थी कि सारना के पास भूमि आवंटित होने के बावजूद भवन न होने से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। इस पर मंत्री ने निर्माण कार्य को जल्द शुरू करने का आश्वासन दिया।

मंत्री की घोषणा और निर्माण की उम्मीद

मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय भवन का निर्माण राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली और छात्राओं व छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भूमि आवंटन और बजट की उपलब्धता के बाद निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी। यह घोषणा छात्र समुदाय और स्थानीय लोगों के बीच उत्साह का विषय बन गई है। ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने भी इस अवसर पर कहा कि विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होने चाहिए, ताकि छात्रों को सक्षम नेतृत्व का अनुभव मिल सके।

इस बीच, इस दौरे को लेकर राजनीतिक बहस भी गरमाई है। एनएसयूआई (NSUI) जिलाध्यक्ष अजय सिंह ठाकुर ने मंत्री के आगमन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने विश्वविद्यालय के लिए 120 एकड़ भूमि और 480 करोड़ रुपये का बजट पहले ही प्रदान किया था, लेकिन पिछले छह वर्षों में केवल नामकरण और घोषणा की राजनीति की गई।

एनएसयूआई का आरोप है कि भाजपा ने निर्माण कार्य में देरी कर आदिवासी और स्थानीय समुदायों के हितों की अनदेखी की है। उन्होंने मंत्री और सांसद से पूछा कि इतने वर्षों के बाद अब तक ठोस निर्माण क्यों नहीं शुरू हो सका। 

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