बिहार के कई जिलों में हुई एक स्टडी में 40 महिलाओं के ब्रेस्टमिल्क के नमूनों में यूरेनियम के अंश पाए गए, जिसके बाद बच्चों की सेहत को लेकर चिंताएं उभरी हैं। हालांकि AIIMS विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने बताया कि पाया गया स्तर WHO सीमा से काफी कम है और इससे शिशुओं पर गंभीर प्रभाव की संभावना बहुत कम है।
Uranium In Breastmilk Study: बिहार के भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा जैसे जिलों में अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच की गई एक स्टडी में 40 माताओं के ब्रेस्टमिल्क के नमूनों में यूरेनियम (U-238) की थोड़ी मात्रा पाई गई। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद बच्चों की सेहत को लेकर सवाल उठे, लेकिन AIIMS दिल्ली के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह स्तर WHO मानक से काफी कम है और इससे शिशुओं को गंभीर नुकसान की आशंका नहीं है। विशेषज्ञों ने स्तनपान को पूरी तरह सुरक्षित और पोषण का सर्वोत्तम स्रोत बताया।
ब्रेस्टमिल्क में यूरेनियम मिलने पर उठे सवाल
बिहार के कई जिलों में की गई एक स्टडी में 40 माताओं के दूध के नमूनों में यूरेनियम के अंश पाए जाने के बाद बच्चों की सेहत को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट में U-238 का स्तर बेहद कम पाया गया है, लेकिन शुरुआती निष्कर्षों ने लोगों में चिंता बढ़ा दी। हालांकि शीर्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मात्रा WHO के मानक से कई गुना कम है और इससे बच्चों को किसी गंभीर खतरे की आशंका नहीं है।
दिल्ली AIIMS के बायोकेमिस्ट्री विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा के अनुसार स्तनपान अभी भी शिशुओं के लिए सबसे सुरक्षित और संपूर्ण पोषण का स्रोत है। उन्होंने बताया कि विश्लेषण के लिए भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा जैसे पहले से यूरेनियम प्रभावित जिलों में शोध किया गया। यह अध्ययन अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच किया गया था।

क्या नुकसान पहुंचा सकता है यूरेनियम
डॉ. शर्मा कहते हैं कि अगर यूरेनियम का स्तर ज्यादा हो तो यह बच्चों की याददाश्त, आईक्यू, ग्रोथ और किडनी पर असर डाल सकता है। लंबे समय में कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है। लेकिन मौजूदा रिपोर्ट में पाए गए स्तर इतने कम हैं कि इससे किसी गंभीर प्रभाव की संभावना बहुत कम है।
उन्होंने बताया कि ज्यादातर यूरेनियम शरीर से यूरिन के जरिए बाहर निकल जाता है। स्टडी में 0 से 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक का स्तर मिला, जबकि WHO की सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है। इस आधार पर उन्होंने कहा कि माताओं को स्तनपान रोकने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है।
यूरेनियम कहां से आता है और क्यों बढ़ रही है चर्चा
यूरेनियम एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी धातु है जो सामान्य रूप से मिट्टी, चट्टानों और भूजल में पाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में भूजल स्तर में यूरेनियम बढ़ने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकार की निगरानी बढ़ी है।
स्टडी का विश्लेषण NIPER हाजीपुर में किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रिपोर्टें सरकार को जल गुणवत्ता सुधारने और बेहतर नीतियां बनाने में मदद करती हैं। जल शक्ति मिशन के तहत सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास भी इसी लक्ष्य का हिस्सा हैं।
बचाव के तरीके और विशेषज्ञों की सलाह
डॉ. शर्मा के अनुसार, जिन क्षेत्रों में भूजल में यूरेनियम का स्तर पाया जाता है, वहां लोगों को सरकारी स्वच्छ जल आपूर्ति का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही हाइजीन बनाए रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच से किसी भी संभावित समस्या का पता समय रहते लगाया जा सकता है। इससे उपचार की संभावना बढ़ जाती है और स्वास्थ्य जोखिम कम हो जाते हैं।













