उस्मान हादी की मौत से बांग्लादेश में हिंसा, ढाका समेत कई शहरों में तनाव

उस्मान हादी की मौत से बांग्लादेश में हिंसा, ढाका समेत कई शहरों में तनाव

छात्र आंदोलन नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़क गई। ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। सरकार ने शांति की अपील की है, जबकि सुरक्षा बलों को तनावग्रस्त इलाकों में तैनात किया गया।

Dhaka: बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक हिंसा और अस्थिरता की चपेट में आ गया है। 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी के निधन के बाद देश के कई शहरों में हालात बिगड़ गए हैं। हादी की मौत सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। उनके निधन की खबर सामने आते ही ढाका समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और तनाव का माहौल बन गया।

सिंगापुर में इलाज के दौरान हुआ निधन

शरीफ उस्मान हादी को कुछ दिन पहले ढाका में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। सिर में गोली लगने के कारण उनकी हालत गंभीर थी। पहले उन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए एवरकेयर अस्पताल ले जाया गया। जब वहां भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें सिंगापुर भेजा गया। सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार को उनकी मौत हो गई।

सिंगापुर के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि शरीफ उस्मान हादी की मौत गोलीबारी में लगी गंभीर चोटों के कारण हुई। फिलहाल उनके पार्थिव शरीर को सिंगापुर से ढाका लाने की प्रक्रिया चल रही है।

ढाका में कैसे हुआ हमला

घटना 12 दिसंबर की है। शरीफ उस्मान हादी ढाका के पलटन इलाके में कल्वरट रोड पर बैटरी से चलने वाले एक ऑटो-रिक्शा में यात्रा कर रहे थे। उसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने अचानक उन पर फायरिंग कर दी। गोली सीधे उनके सिर में लगी। हमले के बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई। पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन हमलावर फरार हो गए। इस हमले ने पहले से तनावग्रस्त राजनीतिक माहौल को और भड़का दिया।

उस्मान हादी कौन थे

शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश के जुलाई 2024 छात्र आंदोलन का एक जाना पहचाना चेहरा थे। वह हसीना विरोधी मंच इंकलाब मंच के प्रवक्ता थे। इंकलाब मंच जुलाई 2024 में हुए बड़े विद्रोह के दौरान चर्चा में आया था। इसी आंदोलन को शेख हसीना सरकार के खिलाफ सबसे मजबूत जनआंदोलन माना गया, जिसने अंततः उनकी सत्ता से विदाई की राह तैयार की।

हादी को युवाओं के बीच एक निडर और मुखर नेता के रूप में जाना जाता था। वह लगातार सरकार की नीतियों की आलोचना करते थे और छात्रों व आम नागरिकों के हक की बात करते थे। इसी वजह से उनके समर्थकों की संख्या तेजी से बढ़ी थी।

आगामी चुनाव में भी थी अहम भूमिका

शरीफ उस्मान हादी फरवरी में होने वाले आगामी आम चुनावों में उम्मीदवार भी थे। वह ढाका-8 निर्वाचन क्षेत्र से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव प्रचार कर रहे थे। हमले के समय भी वह इसी सिलसिले में लोगों से मिल रहे थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता और खुला हसीना विरोध ही इस हमले की बड़ी वजह हो सकता है।

मौत के बाद बिगड़े हालात

हादी की मौत की खबर सामने आते ही बांग्लादेश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। ढाका, चटगांव और अन्य बड़े शहरों में समर्थक सड़कों पर उतर आए। कई जगह झड़पों की खबरें भी सामने आईं। प्रदर्शनकारी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। सुरक्षा बलों को कई इलाकों में तैनात किया गया है ताकि हालात नियंत्रण में रखे जा सकें।

मुहम्मद यूनुस का राष्ट्र के नाम संदेश

मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए शरीफ उस्मान हादी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज मैं देश के सामने बेहद दुखद खबर लेकर आया हूं। जुलाई विद्रोह के निडर अग्रिम पंक्ति के लड़ाके और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी अब हमारे बीच नहीं रहे।

यूनुस ने उनकी मौत पर एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस गोलीबारी के पीछे जो भी लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें जल्द पकड़कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

संयम बनाए रखने की अपील

मुहम्मद यूनुस ने नागरिकों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि मैं सभी नागरिकों से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि धैर्य रखें और कानून अपने हाथ में न लें। हादी पराजित ताकतों और फासीवादी आतंकवादियों का दुश्मन था। उनका यह बयान अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और अब भंग हो चुकी अवामी लीग पर एक तीखा कटाक्ष माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शरीफ उस्मान हादी की हत्या ने बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर हिंसक मोड़ पर ला खड़ा किया है। जुलाई 2024 के आंदोलन के बाद भी देश पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाया था। अब इस घटना ने पुराने घाव फिर से हरे कर दिए हैं। विपक्षी गुट इसे राजनीतिक हत्या बता रहे हैं, जबकि सरकार जांच पूरी होने तक किसी नतीजे पर पहुंचने से बच रही है।

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