उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विधायकों की बैठक में पार्टी संगठन और सरकार में उनके उचित प्रतिनिधित्व पर चर्चा हुई। सपा ने नाराज विधायकों को सम्मान का ऑफर दिया, जिससे भाजपा पर राजनीतिक दबाव और सवाल उठे।
UP News: उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विधायकों की हालिया बैठक ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बैठक के बाद सपा ने ब्राह्मण समुदाय को अपने पक्ष में जोड़ने का प्रस्ताव रखा है, जिससे अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भाजपा के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है और राज्य की राजनीति पर इसका क्या असर होगा।
बैठक का आयोजन
कुशीनगर के भाजपा विधायक पंचानंद पाठक के राजधानी स्थित आवास पर मंगलवार को यह बैठक हुई। इसमें भाजपा के लगभग 40 ब्राह्मण विधायक और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) शामिल हुए, जिनमें अधिकतर बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्र के थे। इसके अलावा अन्य दलों के ब्राह्मण विधायकों ने भी इसमें भाग लिया।
बैठक में मुख्य रूप से समाज की एकजुटता बढ़ाने और इसे स्पष्ट संदेश देने पर चर्चा हुई। चर्चा का केंद्र यह था कि पिछले कुछ समय से राजनीति दलों और उनके नेताओं द्वारा समाज के खिलाफ उठाए गए मुद्दों का सामना कैसे किया जाए। इस दौरान ब्राह्मण समाज के विधायकों ने संगठन और सरकार में उचित प्रतिनिधित्व और सम्मान न मिलने पर भी चिंता व्यक्त की।
भाजपा के भीतर ब्राह्मणों की भूमिका

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज का योगदान भाजपा की सफलता में अहम माना जाता है। इसके बावजूद पार्टी संगठन और सरकार में उनके उचित प्रतिनिधित्व को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि ब्राह्मणों की अपेक्षा अन्य जातियों को अधिक तवज्जो दी जाती है। यह मुद्दा राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार पार्टी के लिए संवेदनशील हो सकता है।
सपा ने दिया ऑफर
समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस अवसर का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर भाजपा से नाराज ब्राह्मण विधायक उनकी पार्टी में आएं, तो उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। इसके अलावा सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज करते हुए लिखा कि जब बड़े लोग आ ही रहे हैं तो मुख्यमंत्री जी को भी इस बारे में जानकारी दे दी जाए।
बैठक में शामिल प्रमुख विधायक
बैठक में मीरजापुर विधायक रत्नाकर मिश्रा, शलभ मणि त्रिपाठी, ऋषि त्रिपाठी, प्रेमनारायण पांडेय, प्रकाश द्विवेदी, रमेश मिश्रा, अंकुर राज तिवारी और विनय द्विवेदी शामिल थे। एमएलसी साकेत मिश्रा और अन्य ब्राह्मण प्रतिनिधि भी बैठक में उपस्थित थे।
बैठक के आयोजक पंचानंद पाठक ने बैठक को लेकर कहा कि यह केवल एक सामाजिक भोज कार्यक्रम था। इसमें भूमिहार बिरादरी के जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि बैठक में आपस में चर्चा हुई, एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होने की बात हुई और यह पूरी तरह पारिवारिक और औपचारिक थी। उनका कहना था कि इसका कोई राजनीतिक मतलब नहीं है।










