अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को लेकर लोगों में भारी उत्साह और उल्लास देखने को मिला। हालांकि महोत्सव औपचारिक रूप से 5 दिसंबर तक चलेगा, लेकिन 24 नवंबर से शुरू हुए इसके मुख्य कार्यक्रम मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के अवसर पर 1 दिसंबर को गीता पूजन और दीपोत्सव के साथ संपन्न हो गए।
Kurukshetra: इस वर्ष आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव (International Gita Mahotsav) ने न केवल भव्यता के नए कीर्तिमान स्थापित किए, बल्कि अपनी वैश्विक पहचान को भी अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुंचाया। यह महोत्सव औपचारिक रूप से भले ही 5 दिसंबर तक चले, लेकिन इसके मुख्य धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन 24 नवंबर से 1 दिसंबर के बीच सम्पन्न हुए। इस बार का आयोजन इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री और संत-महात्माओं की व्यापक भागीदारी देखने को मिली।
महोत्सव की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसकी गूंज देश की सीमाओं से पार करते हुए करीब 58 देशों तक पहुंची। आठ दिनों तक धर्मनगरी कुरुक्षेत्र अध्यात्म, संस्कृति, संगीत, कला और वैश्विक संवाद का केंद्र बनी रही। भगवद् गीता के श्लोकों का पाठ, दीपोत्सव और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने इसे एक Global Spiritual Festival का स्वरूप दे दिया।
2015 से शुरू हुई थी अंतरराष्ट्रीय यात्रा
करीब 10 वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से इस महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप मिला था। वर्ष दर वर्ष इसके कद में बढ़ोतरी होती रही और इस बार यह आयोजन अपने अब तक के सबसे व्यापक और गरिमामय स्वरूप में सामने आया। महोत्सव का शुभारंभ 15 नवंबर को राज्यपाल प्रो. असीम घोष द्वारा ब्रह्मसरोवर तट पर गीता पूजन और घंटा बजाकर किया गया। इसके साथ ही सरस और शिल्प मेला भी शुरू हुआ, जो इस बार पहली बार पूरे 21 दिन तक आयोजित किया गया।
इस बार महोत्सव में 22 से अधिक भारतीय राज्यों के कारीगरों और कलाकारों ने भाग लिया। वहीं, छह देशों से आए शिल्पकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में 16 देशों से 25 स्कॉलर्स ने शिरकत कर गीता दर्शन पर गहन मंथन किया। इसके अलावा फिजी और त्रिनिदाद से आए 20 पंडितों की उपस्थिति ने इस महोत्सव को और भी अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
महोत्सव के कार्यक्रम दुनिया के 58 देशों में आयोजित किए गए, वहीं कई देशों के भारतीय दूतावासों (Indian Embassies) में भी गीता महोत्सव के विशेष आयोजन हुए।
VIP आगमन से बढ़ी महोत्सव की वैश्विक गरिमा

इस बार पहली बार इतने बड़े स्तर पर VVIP Participation देखने को मिली:
- 24 नवंबर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में भाग लिया और ब्रह्मसरोवर पर पूजन किया।
- 25 नवंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रह्मसरोवर तट पर महाआरती की और देश-विदेश को गीता का संदेश दिया।
- 29 नवंबर: केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विराट संत सम्मेलन में शामिल हुए।
- 30 नवंबर: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन देव स्थानम सम्मेलन में पहली बार कुरुक्षेत्र आए।
- 1 दिसंबर: योग गुरु स्वामी रामदेव वैश्विक गीता पाठ में शामिल हुए।
इसके अलावा मुख्यमंत्री नायब सैनी छह बार और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली दो बार महोत्सव में पहुंचे।
इस बार पहली बार हुए कई ऐतिहासिक प्रयोग
- केंद्रीय विदेश मंत्रालय सीधे तौर पर महोत्सव में सहभागी बना।
- देश के प्रमुख हवाई अड्डों (Airports) पर गीता महोत्सव के होर्डिंग लगाए गए।
- श्री जगन्नाथ मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर, कृष्ण जन्मभूमि, बांके बिहारी मंदिर सहित प्रमुख तीर्थों पर कार्यक्रमों का Live Telecast हुआ।
- 21 हजार स्कूली बच्चों ने एक साथ वैश्विक गीता पाठ में भाग लिया।
- शहर की 18 सामाजिक संस्थाओं ने गीता के 18 अध्यायों की थीम पर शोभायात्रा निकाली।
- देव स्थानम सम्मेलन में 64 प्रमुख देव स्थानों के पुजारी और संचालक पहुंचे।
महोत्सव में देश के प्रसिद्ध कलाकारों और भजन गायकों ने आध्यात्मिक वातावरण को और खास बना दिया। पद्मिनी कोल्हापुरी, पुनीत इस्सर, सुरेश वाडेकर, डॉ. हरिओम पंवार, साध्वी पूर्णिमा और अनूप जलोटा जैसे कलाकारों की प्रस्तुतियों ने हजारों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।











