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शी जिनपिंग-मोदी की होगी मुलाकात: क्या रेयर अर्थ सप्लाई पर डील बनेगी?

शी जिनपिंग-मोदी की होगी मुलाकात: क्या रेयर अर्थ सप्लाई पर डील बनेगी?

भारत और चीन के बीच इस वीकेंड मोदी– शी जिनपिंग की मुलाकात अहम मानी जा रही है। भारत के वाहन निर्माता हैवी रेयर अर्थ मेटल्स की भारी कमी झेल रहे हैं क्योंकि चीन ने अप्रैल से सप्लाई रोक दी है। 50 से ज्यादा इंपोर्ट आवेदन अटके हैं। मुलाकात से सप्लाई बहाली पर ठोस समाधान निकलने की उम्मीद है।

Rare earth metal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस वीकेंड आमने-सामने मिलेंगे, जहां कई मुद्दों पर चर्चा होगी। लेकिन सबसे अहम विषय रहेगा रेयर अर्थ मेटल्स की सप्लाई, जो अप्रैल से रुकी हुई है और भारत के ऑटो सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। 50 से अधिक भारतीय आवेदन चीन में अटके पड़े हैं, जिससे वाहन निर्माता डिजाइन बदलने और वैकल्पिक सोर्स तलाशने पर मजबूर हैं। हाल के महीनों में संबंध सुधार के संकेत मिले हैं, ऐसे में इस मुलाकात से समाधान की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

भारत के 50 से ज्यादा आवेदन चीन में अटके

रेयर अर्थ मेटल्स की कमी भारत के उद्योग जगत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। चीन ने अप्रैल से इनकी सप्लाई पर रोक लगा रखी है। भारत से 50 से ज्यादा इंपोर्ट आवेदन अभी भी बीजिंग में लंबित पड़े हैं। दुनिया के 90 फीसदी रेयर अर्थ प्रोसेसिंग पर चीन का नियंत्रण है और अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के चलते उसने कई देशों को सप्लाई रोक दी थी। भारत भी इसी सख्ती का शिकार बना।

हालांकि जुलाई में चीन से भारत आने वाली कुल शिपमेंट में हल्की बढ़ोतरी दर्ज हुई, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह केवल हल्के ग्रेड रेयर अर्थ मेटल्स की आपूर्ति की वजह से हुआ। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से छोटी मोटर्स में होता है, जबकि ऑटो सेक्टर को भारी ग्रेड वाले मेटल्स की जरूरत है।

चीन ने पहले दिया था भरोसा

नई दिल्ली के अधिकारियों का कहना है कि चीन ने हाल ही में भारत को खाद, रेयर अर्थ और माइनिंग मशीनों की सप्लाई बहाल करने का आश्वासन दिया था। विदेश मंत्री वांग यी भी इस महीने की शुरुआत में दो दिन के भारत दौरे पर आए थे। हालांकि तब जारी किए गए चीन के आधिकारिक बयान में रेयर अर्थ सप्लाई का कोई जिक्र नहीं था। यही वजह है कि अब मोदी और जिनपिंग की मुलाकात को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

भारत और चीन के बीच हाल ही में कुछ सकारात्मक कदम भी उठे हैं। जैसे सीधी उड़ानें शुरू करना और सीमा पर तनाव कम करने के लिए बातचीत। लेकिन मिनरल्स की सप्लाई पर सामान्य स्थिति अभी भी बहाल नहीं हुई है।

ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर

भारत का ऑटो उद्योग रेयर अर्थ मेटल्स की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। वाहन निर्माता कंपनियों को अपने डिजाइन बदलने पड़े हैं ताकि हैवी रेयर अर्थ मेटल्स पर निर्भरता घटाई जा सके। कई कंपनियां अब हल्के ग्रेड वाले मेटल्स या फेराइट-बेस्ड मटीरियल्स का इस्तेमाल करने लगी हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार घरेलू स्तर पर रेयर अर्थ प्रोडक्शन को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है। लेकिन यह महंगा और समय लेने वाला कदम होगा। देश की बड़ी कंपनी बजाज ऑटो ने भी कहा कि वह वैकल्पिक सोर्स तलाश रही है और ऐसे मेटल्स विकसित करने पर काम कर रही है जिनमें हैवी रेयर अर्थ मेटल्स की जरूरत न पड़े।

तस्करी पर चीन की जीरो टॉलरेंस नीति

सप्लाई की भारी कमी ने वाहन निर्माताओं को मजबूरी में कुछ असामान्य कदम उठाने पर विवश कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक कुछ मामलों में हैवी रेयर अर्थ मेटल्स को एयरलाइन के हैंड बैग में भारत लाया गया। वहीं कुछ बार इन्हें ग्रेनाइट स्लैब्स के बीच छिपाकर भी भेजा गया।

जुलाई में चीन की सरकारी मीडिया ने रिपोर्ट किया था कि बीजिंग ने रेयर अर्थ की तस्करी पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उसने झूठे दावों और तीसरे देशों के जरिए होने वाली अवैध शिपमेंट्स पर सख्त कार्रवाई करने का ऐलान किया। इसी महीने चीन के खुफिया अधिकारियों ने कुछ विदेशी एजेंसियों पर डाक के जरिए रेयर अर्थ सामग्री चुराने का आरोप भी लगाया था।

भारत-चीन रिश्तों के लिए अहम मुलाकात

मोदी और जिनपिंग की यह मुलाकात केवल मिनरल्स तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह दोनों देशों के रिश्तों के लिए भी एक बड़ा टेस्ट साबित होगी। खासकर ऐसे समय में जब भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर रिश्तों में खटास आई है। गलवान संघर्ष के बाद यह आमना-सामना और भी अहम माना जा रहा है।

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