पुतिन की भारत यात्रा से पहले यूके, फ्रांस और जर्मनी के राजदूतों ने यूक्रेन युद्ध पर उनकी आलोचना की। भारत ने इस बयान को अनुचित बताते हुए कहा कि तीसरे देश के संबंधों पर सार्वजनिक टिप्पणी कूटनीतिक मर्यादा के खिलाफ है।
Putin India Visit: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। पुतिन आज यानि 4 दिसंबर से भारत आने वाले हैं और यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिमी देश यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर लगातार दबाव बढ़ा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत में तैनात यूके, फ्रांस और जर्मनी के राजदूतों ने एक संयुक्त लेख प्रकाशित कर पुतिन की आलोचना की, जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। विदेश मंत्रालय ने इसे अनुचित और गलत कूटनीतिक व्यवहार बताया है।
भारत का कहना है कि किसी तीसरे देश के साथ भारत के संबंधों पर सार्वजनिक मंच से टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं है। पुतिन की यात्रा के ठीक पहले आया यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूरोपीय देशों के राजदूतों का सार्वजनिक रूप से पुतिन की यात्रा पर टिप्पणी करना कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अपने अंतरराष्ट्रीय संबंध स्वतंत्र रूप से तय करता है और किसी भी विदेशी प्रतिनिधि को इस बारे में खुले तौर पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह बेहद असामान्य है कि किसी देश के राजनयिक भारत के तीसरे देशों के साथ संबंधों पर सार्वजनिक रूप से बयान दें। यह अच्छी कूटनीतिक प्रक्रिया नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे बयान द्विपक्षीय संबंधों की गंभीरता को प्रभावित कर सकते हैं।
यूरोपीय देशों के राजदूतों का प्रकाशित लेख

फ्रांस के राजदूत थिएरी मथौ, जर्मनी के उच्चायुक्त फिलिप एकरमैन और ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरून ने एक संयुक्त लेख प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था
“दुनिया चाहती है कि यूक्रेन युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन रूस शांति को लेकर गंभीरता से नहीं सोच रहा है”।
यह लेख पुतिन की भारत यात्रा के ठीक पहले जारी हुआ, जिससे इसका प्रभाव और बढ़ गया। लेख में तीनों देशों के प्रतिनिधियों ने रूस पर यूक्रेन युद्ध को जारी रखने का आरोप लगाया और कहा कि रूस के कदम वैश्विक शांति में बाधा बन रहे हैं।
लेख में पुतिन की आलोचना
संयुक्त लेख में यूरोपीय देशों के राजदूतों ने कहा कि पुतिन के निर्देश पर यूक्रेन पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले किए जा रहे हैं जो किसी भी शांति-साधक नेता के कदम नहीं हो सकते। लेख में यह भी कहा गया कि ये हमले कोई दुर्घटना या अनियोजित कार्रवाई नहीं हैं बल्कि रूस के कठोर और आक्रामक रुख का संकेत हैं।
लेख में दावा किया गया कि पुतिन बार-बार शांति वार्ताओं को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। राजदूतों का कहना है कि रूस की सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में बढ़ी है जब दुनिया युद्ध समाप्त करने के विकल्प तलाश रही है।
NATO देशों का स्पष्ट संदेश
यूके, फ्रांस और जर्मनी तीनों NATO सदस्य देश हैं और लंबे समय से यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं। लेख में उन्होंने यह भी लिखा कि युद्ध समाप्त होने तक हर संभव सहायता जारी रहेगी। इसमें सैन्य, मानवीय और आर्थिक दोनों प्रकार की मदद शामिल है।
यूरोपीय देशों ने कहा कि रूस शांति प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं ले रहा है जबकि यूक्रेन ने कई बार बातचीत की इच्छा जताई है। लेख में यह भी संकेत दिया गया कि पुतिन की नीतियों ने यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर डाला है।










