अमेरिकी सांसदों का ताइवान दौरा चीन को नागवार गया। अमेरिका-ताइवान संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार पर चर्चा के लिए अमेरिकी सांसदों की यात्रा जारी है। चीन ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया।
US-China: अमेरिकी सीनेटरों के ताइवान दौरे से चीन भड़क गया है। बीजिंग ने इस कदम को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करार देते हुए वाशिंगटन की कड़ी आलोचना की है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और दोनों पक्षों के अधिकारियों के किसी भी प्रकार के संपर्क का विरोध करता है। अमेरिका ने हालांकि स्पष्ट किया है कि यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और निवेश पर चर्चा के लिए किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की इंडो-पैसिफिक नीति का हिस्सा है, और इसका मकसद ताइवान के साथ अपने रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है।
अमेरिकी सांसद ताइवान क्यों गए?
अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर और डेब फिशर ताइवान के वरिष्ठ नेताओं से उच्च स्तरीय बैठकें करने के लिए ताइपे पहुंचे। इन बैठकों में अमेरिका-ताइवान संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और निवेश पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। विकर ने कहा कि एक समृद्ध लोकतंत्र कभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता और उनका दौरा इस क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक शांति पर विचार करने के लिए महत्वपूर्ण है। फिशर ने भी कहा कि वैश्विक अस्थिरता के समय में ताइवान में उनका दौरा बेहद आवश्यक है, और बातचीत का फोकस क्षेत्र की सुरक्षा, अवसरों और प्रगति पर रहेगा।
चीन का कड़ा विरोध
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इस दौरे का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करता है। उनका कहना था कि यह ताइवान की स्वतंत्रता चाहने वाली अलगाववादी ताकतों को गलत संदेश देता है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाता है। चीन बार-बार कह चुका है कि ताइवान उसका हिस्सा है और किसी भी तरह के आधिकारिक संपर्क को वह स्वीकार नहीं करता। बीजिंग ने चेतावनी दी है कि इस तरह के दौरे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा हैं।
अमेरिकी सांसदों की पिछली यात्रा
इस दौरे से पहले, विकर और फिशर हवाई, गुआम, टिनियन, पाला और फिलीपींस का दौरा कर चुके हैं। अमेरिका का यह दौरा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा चीन के लिए स्पष्ट संदेश है कि अमेरिका ताइवान के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देगा और इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
ताइवान को हथियार देता है अमेरिका
अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है। वह द्वीप को अत्याधुनिक टैंक, वायु रक्षा मिसाइलें और एफ-16 लड़ाकू विमान प्रदान करता है, ताकि बीजिंग की धमकियों के खिलाफ उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। चीन का मानना है कि यह अमेरिकी कदम पिछली सरकारों द्वारा किए गए वादों का उल्लंघन है। अमेरिका की यह नीति ताइवान की सुरक्षा को मजबूत करती है और इसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का एक अहम हिस्सा माना जाता है।
ताइवान और चीन के बीच संवेदनशील संबंध
ताइवान चीन के लिए अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है। बीजिंग इसे अपना हिस्सा मानता है और किसी भी प्रकार की स्वतंत्रता की कोशिश को रोकने के लिए सख्त कदम उठाता है। अमेरिका के इस दौरे से चीन और ताइवान के बीच तनाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा अमेरिका-ताइवान संबंधों को और मजबूत करेगा, लेकिन साथ ही चीन के प्रति चुनौतियों और क्षेत्रीय तनाव को भी बढ़ा सकता है।