राजनाथ सिंह के बयान पर Opposition का तीखा पलटवार, कांग्रेस ने कहा- 'इतिहास से नहीं, सेना से जुड़ी जिम्मेदारियों पर दें ध्यान'

राजनाथ सिंह के बयान पर Opposition का तीखा पलटवार, कांग्रेस ने कहा- 'इतिहास से नहीं, सेना से जुड़ी जिम्मेदारियों पर दें ध्यान'

रक्षा मंत्री Rajnath Singh के हालिया बयान ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने उनके उस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है, जिसमें उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru को लेकर बाबरी मस्जिद के निर्माण से जुड़ा दावा किया था। 

नई दिल्ली: कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए सरकारी धन इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा था, जिसका सरदार वल्लभभाई पटेल ने विरोध किया था। मंगलवार को दिए गए इस बयान के बाद कांग्रेस ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ और राजनीति से प्रेरित आरोप बताया है तथा कहा है कि इस तरह के दावे स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं की छवि को धूमिल करने की कोशिश हैं।

क्या था रक्षा मंत्री का बयान?

मंगलवार को वडोदरा के पास साधली गांव में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित “Ekta March” को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि नेहरू ने कथित तौर पर अयोध्या में बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए public fund का उपयोग करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन सरदार पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया था।

उन्होंने यह भी कहा कि पटेल का स्पष्ट मत था कि किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण में सरकारी धन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। राजनाथ सिंह ने आगे यह भी दावा किया कि पटेल की मृत्यु के बाद उनके स्मारक के लिए एकत्रित धन को नेहरू ने कुएं और सड़कें बनाने में खर्च करने की सलाह दी थी, जो उनके अनुसार एक “अजीब सुझाव” था।

कांग्रेस का तीखा जवाब

रक्षा मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद Imran Pratapgarhi ने सवाल उठाते हुए कहा कि राजनाथ सिंह जैसे अनुभवी नेता से इस तरह के बिना प्रमाण दिए गए बयान की उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने कहा,

'एक डिफेंस मिनिस्टर और पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे जब भी historical context में कोई बात रखें, तो उसके ठोस फैक्ट्स और दस्तावेज़ी प्रमाण हों। यह कोई साधारण राजनीतिक टिप्पणी नहीं है।'

कांग्रेस सांसद Manish Tewari ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार तोड़ने-मरोड़ने के बजाय रक्षा मंत्री को देश के सामने मौजूद strategic challenges और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के सांसद Dharmendra Yadav ने भी इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री को घेरा। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें देश की सेना, सैनिकों की सुविधाओं और defence preparedness जैसे अहम मुद्दों पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने कहा,

'डिफेंस मिनिस्टर का पहला दायित्व सेना और सीमाओं की सुरक्षा है। ऐसे बयानों से अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं। भारतीय जनता पार्टी ऐतिहासिक तथ्यों को जिस तरह से प्रस्तुत करती है, देश उसे अच्छी तरह समझता है।'

राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब देश में ऐतिहासिक घटनाओं और उनसे जुड़े नैरेटिव को लेकर लगातार बहस चल रही है। विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल बार-बार history reinterpretation के जरिए राजनीतिक फायदे लेने की कोशिश करता है, जबकि सरकार का कहना है कि वह दबे हुए तथ्यों को सामने ला रही है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ऐतिहासिक विषयों को political debate का हिस्सा बनाना उचित है, खासकर तब जब देश राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक अस्थिरता जैसे अहम मुद्दों का सामना कर रहा है।

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