संतान सप्तमी व्रत 30 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से निसंतान दंपत्ति को संतान सुख प्राप्त होता है और बच्चों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कथा श्रवण के बिना व्रत अधूरा माना जाता है और यह संतान की रक्षा तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद फलदायी होता है।
Santan Saptami 2025: यह पावन व्रत 30 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। इसे ललिता सप्तमी भी कहा जाता है और यह गणेश चतुर्थी के चौथे दिन आता है। मान्यता है कि इस व्रत से निसंतान दंपत्ति को संतान सुख प्राप्त होता है, जबकि बच्चों के जीवन में तरक्की, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पूजा के साथ कथा श्रवण करना इस व्रत को पूर्ण बनाता है।
कब और क्यों मनाया जाता है संतान सप्तमी
संतान सप्तमी 2025 में 30 अगस्त को मनाई जाएगी। यह व्रत गणेश चतुर्थी के चौथे दिन आता है और इसे ललिता सप्तमी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से निसंतान दंपत्ति को संतान सुख प्राप्त होता है और बच्चों के जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति आती है। इस दिन संतान सप्तमी की पूजा और कथा का श्रवण विशेष महत्व रखता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने बताया था व्रत का महत्व
पुराणों में उल्लेख है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर को संतान सप्तमी व्रत का महत्व समझाया था। इसके साथ ही राजा नहुष और उनकी पत्नी रानी चंद्रमुखी से जुड़ी कथा भी इस व्रत की महिमा को दर्शाती है। इस कथा से स्पष्ट होता है कि यह व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने पर संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि का वरदान देता है।
रानी चंद्रमुखी और रूपमती की कथा
कथा के अनुसार, अयोध्या की रानी चंद्रमुखी ने अपनी सहेली रूपमती के साथ संतान सप्तमी व्रत की शुरुआत की। रूपमती ने इसे नियम से किया और उसे आठ संतान प्राप्त हुईं। वहीं, चंद्रमुखी ने कभी व्रत किया और कभी नहीं, जिसके कारण अगले जन्म में भी वह निसंतान रही। अंत में उसने व्रत का महत्व समझकर श्रद्धा से पालन किया और संतान सुख प्राप्त किया।
संतान की रक्षा के लिए क्यों जरूरी है कथा श्रवण
धार्मिक मान्यता है कि संतान सप्तमी व्रत केवल पूजा करने से पूर्ण नहीं होता, बल्कि इसकी कथा का श्रवण अनिवार्य है। कथा से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और जीवन में बच्चों को तरक्की, स्वास्थ्य और सुख मिलता है। यही कारण है कि इस दिन कथा वाचन और श्रवण को विशेष महत्व दिया गया है।