उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में Ease of Doing Business को और सशक्त बनाने और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया है कि सरकार जल्द ही "सुगम्य व्यापार (प्राविधानों का संशोधन) विधेयक, 2025" पेश करने जा रही है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आबकारी, वन समेत 11 से अधिक कानूनों में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि सीएम ने एक उच्चस्तरीय बैठक में ‘सुगम्य व्यापार (प्राविधानों का संशोधन) विधेयक, 2025’ के प्राविधानों पर चर्चा की और आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि #EaseofDoingBusiness को और सशक्त बनाने के लिए नए कदम उठाना समय की मांग है। साथ ही, औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों की सुरक्षा और सुविधा की गारंटी भी सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘श्रमेव जयते’ के भाव को आत्मसात करते हुए ऐसे सुधार किए जाएँ, जो श्रमिकों और उद्यमियों दोनों के लिए लाभकारी साबित हों।
सीएम योगी का बड़ा बयान
लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान सीएम योगी ने कहा कि समय की मांग है कि अनावश्यक दंडात्मक प्रावधानों को समाप्त कर, एक पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "श्रमेव जयते" के भाव को आत्मसात करते हुए हमें ऐसे सुधार करने होंगे, जो श्रमिकों और उद्यमियों, दोनों के लिए लाभकारी हों।
सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि "सुगम्य व्यापार (प्राविधानों का संशोधन) विधेयक" का मसौदा ऐसा तैयार किया जाए, जो उद्योग और श्रमिकों के हितों में संतुलन स्थापित कर सके।
किन कानूनों में होगा बदलाव?
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस नए विधेयक के अंतर्गत जिन कानूनों में बदलाव किए जाएंगे, उनमें शामिल हैं:
- आबकारी अधिनियम
- शीरा अधिनियम
- वृक्ष संरक्षण अधिनियम
- राजस्व संहिता
- गन्ना अधिनियम
- भूगर्भ जल अधिनियम
- नगर निगम अधिनियम
- प्लास्टिक कचरा निस्तारण अधिनियम
- सिनेमा अधिनियम
- क्षेत्र और जिला पंचायत अधिनियम
इन सभी कानूनों को अधिक व्यावहारिक बनाया जाएगा। जहां पहले जेल की सजा का प्रावधान था, वहां अब अधिक आर्थिक दंड और प्रशासनिक कार्रवाई पर जोर दिया जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उद्योगों पर अनावश्यक बोझ घटाना जरूरी है ताकि राज्य में निवेश का माहौल और बेहतर हो सके। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना उतना ही आवश्यक है कि श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी बनी रहे।